Instructions for Authors/Submission Guidelines

  • लेखक निर्देश: (Instructions for Authors)
  1. शोध आलेख संस्कृत उद्धरण के साथ, हिन्दी भाषा में ही स्वीकार किये जाते हैं।
  2. शोध आलेख का शीर्षक स्पष्ट, शोधपरक एवं विषयानुकूल होना चाहिये।
  3. लेखक का नाम, पदनाम, संस्था का नाम, ईमेल तथा मोबाइल नंबर, शोध पत्र के प्रथम पृष्ठ पर स्पष्ट रूप से उल्लिखित होना चाहिये।
  4. शोध आलेख- मंगल, कोकिला फॉन्ट, आकार- 14 (Font Size 14) में टंकित होना चाहिये।
  5. सन्दर्भ शैली (Citation Style) - MLA (Latest Edition) अनिवार्य रूप से अपनाई जानी चाहिए (उदाहरण- शास्त्री, डॉ. शिवराज, रत्नावली नाटिका, पृष्ठ संख्या, मेरठ: साहित्य भण्डार, 1998)।
  6. शोध आलेख की शब्द सीमा न्यूनतम 2500 से अधिकतम 3000 शब्द के मध्य होना चाहिए।
  • शोध आलेख में निम्न घटक अनिवार्यतः सम्मिलित हों-
  1. सारांश (Abstract)- (200-300 शब्द)
  2. मुख्य शब्द (Keywords)- (6 से 8 शब्द)
  3. प्रस्तावना
  4. विषय-वस्तु (स्वेच्छया तार्किक उपविभागों सहित)
  5. निष्कर्ष
  6. संदर्भ
  7. संदर्भ ग्रंथ सूची
  • अन्य अनिवार्य शर्तें-
  1. पूर्णतः मौलिक एवं अप्रकाशित शोधालेख ही पत्रिका में प्रकाशन हेतु स्वीकार्य हैं।
  2. लेखक के द्वारा मौलिकता से संबंधित घोषणा पत्र शोधालेख के साथ अवश्य संलग्न करना चाहिए।
  3. यूजीसी के मानकों के अनुसार प्लेगरिज्म (Plagiarism) 10% से कम होना अनिवार्य है।
  4. शोध आलेख के साथ अद्यतन Plagiarism Report संलग्न होना चाहिए।
  5. किसी अन्य पत्रिका में विचाराधीन शोध आलेख स्वीकार्य नहीं है।
  • रिव्यू प्रक्रिया-

 यूजीसी केयर लिस्टेड एवं पीयर रिव्यूड त्रैमासिक शोधपत्रिका

रिव्यू प्रक्रिया 

नाट्यम्, संस्कृत विभाग, डॉक्टर हरीसिंह गौर विश्वविद्यालय, सागर (म.प्र.) की बहुमान्य श्रेष्ठ शोध पत्रिका है, जिसका मुख्य अकादमिक क्षेत्र रंगमंच एवं सौन्दर्यशास्त्र है, नाट्यम् अकादमिक शोध की गुणवत्ता को सुनिश्चित करने के लिए प्राप्त शोध-पत्रों की एक वस्तुनिष्ठ सिंगल/डबल-ब्लाइंड रिव्यू प्रविधि अपनाती है, यह नाट्यम् में प्रकाशित शोध-पत्रों की गुणवत्ता, मौलिकता और तार्किकता को समृद्ध करने के लिए एक सुव्यवस्थित प्रक्रिया है।

नाट्यम् निम्नलिखित चरणों में पीयर रिव्यू प्रक्रिया को सम्पादित करती है:

  • प्रथम चरण: संपादक मंडल द्वारा शोधपत्रों की प्रारम्भिक निरीक्षण-

नाट्यम् पत्रिका का संपादक मंडल प्राप्त शोधपत्र की प्रारम्भिक निरीक्षण निम्नलिखित बिन्दुओं पर करता है-

  • शोधपत्र पत्रिका द्वारा निर्धारित किये गये मानकों को पूरा करता है- जैसे शोध-पत्र का विषय, लेख संरचना और फॉर्मेटिंग, साहित्यिक चोरी (प्लेजियरिज्म) प्रमाण-पत्र, लेख की मौलिकता का लेखक की ओर से घोषणा-पत्र आदि पत्रिका के दिशानिर्देशों के अनुरूप होना चाहिए।
  • शोधपत्र में मुख्य शोध-समस्या और उसका परिणाम स्पष्ट होना चाहिए।
  • शोधपत्र में डेटा प्राप्त करने और डेटा विश्लेषण की स्पष्ट पद्धति प्रयुक्त होनी चाहिए (साहित्य से सम्बंधित शोध-पत्रों को उनकी प्रकृति के आधार पर इस बिन्दु से छूट दी जा सकती है, जिसके संदर्भ में संपादक-मंडल का निर्णय अंतिम होगा।)
  • यदि पत्रिका का विशेषांक प्रकाशित होता है तो शोधपत्रों की विषयवस्तु विशेषांक की मूल भावना के अनुरूप होना चाहिए।
  • पत्रिका के क्रमागत अंक में लेखक की भिन्नता पूर्व निर्धारित है। अत: संपादक मण्डल के अतिरिक्त पत्रिका के क्रमागत अंक में समान लेखक का शोधालेख सम्मिलित नहीं होना चाहिए।
  • शोधपत्र के निष्कर्ष संबंधित शोध-क्षेत्र और विषय के विस्तार और व्यापकता के लिए सार्थक योगदान करने में सक्षम होना चाहिए।
  • द्वितीय चरण: संपादकीय निर्णय-

प्रथम चरण में सफल रहने के बाद द्वितीय चरण में उक्त शोध-पत्र के संदर्भ में उक्त निर्णय लिया जायेगा-

  • शोध-पत्र को समीक्षा के लिए भेजे जाने पर विचार।
  • यदि शोध-पत्र में सीमित स्तर पर किसी सुधार की आवश्यकता है तो उसकी पूर्ति के लिए लेखक को भेजा जायेगा।
  • प्रथम चरण के निरीक्षण बिन्दुओं में शोधपत्र के सफल रहने पर शोधलेखक को मेल द्वारा सूचित कर दिया जायेगा। चयनित शोधालेख एवं लेखकों की सूची विश्वविद्यालय के पोर्टल पर अपलोड की जाएगी।
  • शोध-पत्र का विषय, प्रस्तुति, प्रविधि और आशय आदि नाट्यम्, संस्कृत विभाग, डॉक्टर हरीसिंह गौर विश्वविद्यालय, सागर (म.प्र.) की रंगमंच एवं सौन्दर्यशास्त्र गरिमा के अनुकूल होना चाहिए। अन्यथा की स्थिति में शोधपत्र पत्रिका में प्रकाशन योग्य नहीं माना जाएगा। इसके लिए संपादक मंडल कारण बताने के लिए बाध्य नहीं होगा।
  • तृतीय चरण: समीक्षक का चयन-

द्वितीय चरण में सफल रहने वाले शोधपत्र के विषयवस्तु और गुणवत्ता के परीक्षण के लिए गठित नाट्यम् पत्रिका के समीक्षक मण्डल में से विषय, कार्य, अनुभव और अकादमिक क्षमता के आधार पर उपयुक्त समीक्षक का चयन किया जाता है-

  • अंतरानुशासनिक प्रकृति के शोध-पत्रों की समीक्षा के लिए संपादक-मंडल अपनी समझ और अनुभव के आधार पर उपयुक्त समीक्षक का चयन करेगा।
  • नाट्यम् शोधपत्रों की वस्तुनिष्ठ समीक्षा के लिए सिंगल/डबल ब्लाइंड रिव्यू प्रविधि का पालन करता है, जिसमें लेखक और समीक्षक एक दूसरे की पहचान से अनभिज्ञ रहते हैं।
  • चतुर्थ चरण: समीक्षा प्रक्रिया-

इस चरण में चयनित समीक्षक द्वारा शोधपत्र की समीक्षा निम्नलिखित बिन्दुओं पर किया जाता है-

  • शोध आलेख का विषय, मौलिकता और नवीन दृष्टिकोण।
  • शोध आलेख की प्रासंगिकता, ज्ञान के क्षेत्र में विशिष्ट योगदान की संभावना।
  • स्पष्ट शोध पद्धति और विश्लेषण का तार्किक आधार।
  • भाषा की स्पष्टता, व्याकरणिक शुद्धता एवं सुव्यवस्थित संरचना।
  • संदर्भों का स्पष्ट एवं प्रामाणिक उल्लेख।
  • शोधपत्र पर AI, ChatGPT आदि का प्रभाव नहीं होना।
  • स्पष्ट और सटीक निष्कर्ष एवं सुझाव।
  • पंचम चरण: समीक्षक का प्रतिवेदन-
  • उपर्युक्त बिन्दुओं पर समीक्षा के उपरांत समीक्षक अपना प्रतिवेदन संपादक-मंडल को प्रेषित करता है।
  • प्रतिवेदन की भाषा और संरचना समीक्षक की सुविधा के अनुसार होनी चाहिए, जिसमें इस बात का स्पष्ट उल्लेख हो कि-
  • शोधपत्र प्रकाशन के योग्य है। इस टिप्पणी के बाद समीक्षक इसके समर्थन में बिन्दुओं का उल्लेख भी करेगा,
  • शोधपत्र में सुधार की आवश्यकता है। इस टिप्पणी के बाद समीक्षक इसके समर्थन में बिन्दुवार उन सुधारों का उल्लेख करेगा जिससे संपादक-मंडल संबंधित शोध-लेखक को अवगत करा देगा (इसके बाद शोध लेखक इस बात के लिए स्वतंत्र रहेगा कि संपादक-मंडल द्वारा दिए गये समयावधि में वह अपने शोधपत्र में पुनः सुधार कर भेजे या नहीं, सुधार कर पुनः भेजने की स्थिति में संपादक-मण्डल अपने स्तर पर उसका निरीक्षण करता है और सफल पाए जाने पर प्रकाशन की स्वीकृति लेखक को प्रदान करता है। शोध-आलेख में सुधार का केवल प्रथम प्रयास ही मान्य होगा, इसके लिए अन्य कोई अवसर लेखक को नहीं दिया जायेगा, सुधार हेतु प्रदत्त समयावधि के अनंतर उक्त शोधपत्र के प्रकाशन पर विचार नहीं किया जायेगा।)
  • सुधार के उपरांत शोधपत्र को पुनः प्रस्तुत करने की स्थिति में निम्नलिखित बिन्दुओं का अनुपालन अनिवार्य होगा-
  1. शोध-लेखक को समीक्षा प्रतिवेदन में बताए गए सभी सुझावों का पालन करना होगा।
  2. शोध-लेखक ने जिन बिन्दुओं में सुधार किया है, उसका अलग से स्पष्ट उल्लेख करना होगा।
  • शोधपत्र प्रकाशन योग्य नहीं है। इस टिप्पणी के बाद समीक्षक इसके समर्थन में बिन्दुओं का स्पष्ट उल्लेख करेगा। लेखक को अस्वीकृत किए गए शोधपत्र की सूचना पृथक् से नहीं दी जाएगी।
  • षष्ठ चरण: प्रकाशन प्रक्रिया-
  • इस चरण में प्रकाशन हेतु स्वीकृत शोधपत्रों का संपादक-मण्डल द्वारा पुनः निरीक्षण किया जाता है। स्वीकृत शोध आलेख नाट्यम् के किस अंक/विशेषांक में प्रकाशित होगा, इसके निर्णय का अधिकार केवल संपादक मंडल के पास रहेगा इसमें किसी भी तरह के हस्तक्षेप/आग्रह और दबाव की स्थिति में संपदक मंडल शोधपत्र के प्रकाशन को अस्वीकृत कर सकता है।
  • शोधपत्र के प्रकाशन की स्वीकृति प्रदान किये जाने के बाद शोध लेखक उक्त शोधपत्र को कहीं अन्य स्थान पर प्रकाशन हेतु नहीं भेज सकेगा.
  • नाट्यम् रंगमंच एवं सौन्दर्यशास्त्र की त्रैमासिक यूजीसी केयर लिस्टेड एवं पीयर रिव्यूड शोध पत्रिका है, जो प्रकाशन की समयबद्धता का पालन करती है, किन्तु स्वीकृत शोधपत्रों के प्रकाशन में किसी भी तरह के अनपेक्षित विलंब की स्थिति में नाट्यम् संस्कृत विभाग, डॉक्टर हरीसिंह गौर विश्वविद्यालय, सागर (म.प्र.) की किसी भी तरह की विधिक जवाबदेही सुनिश्चित नहीं की जा सकती। लेखक द्वारा नाट्यम् में शोधपत्र प्रकाशन के लिए भेजे जाने पर यह स्वतः प्रमाणित होगा कि वह नाट्यम् के उपर्युक्त सभी बिन्दुओं और नियमों को स्वीकार करता है।

प्रकाशन एवं शुल्क सम्बन्धी सूचना-

नाट्यम त्रैमासिक शोध पत्रिका में शोध-पत्र का प्रकाशन पूर्णतः नि:शुल्क  है। तथापि, शोध-आलेख की स्वीकृति के उपरांत पत्रिका की प्रति प्रेषण हेतु डाक-व्यय (स्पीड पोस्ट) सहयोग राशि के रूप में ₹100 देय होंगे। साथ ही, पत्रिका की सदस्यता हेतु शुल्क पृथक् से निर्धारित है

सदस्यता शुल्क (व्यक्तिगत) -

 एक वार्षिक - 2500 ₹  एवं डाक व्यय- 400 ₹

 पञ्च वार्षिक - 12500 ₹ एवं डाक व्यय-2000 ₹

सदस्यता शुल्क (संस्थागत/पुस्तकालय) –

एक वार्षिक – 5000 ₹  एवं डाक व्यय- 400 ₹

पञ्च वार्षिक - 25000 ₹ एवं डाक व्यय-2000 ₹

प्रत्येक विशेषांक का शुल्क प्रकाशक- नाट्य परिषद्, संस्कृत विभाग, डॉक्टर हरीसिंह गौर विश्वविद्यालय सागर (म.प्र.) के द्वारा निर्धारित किया जाएगा।

सदस्यता शुल्क ऑनलाइन, मनीऑर्डर, चेक अथवा नगद माध्यम से नाट्य परिषद्, संस्कृत विभाग, डॉक्टर हरीसिंह गौर विश्वविद्यालय सागर (म.प्र.) के बैंक खाते में जमा की जा सकती है। संबंधित शुल्क की रशीद नाट्य परिषद् को भेजनी अनिवार्य है।

Account Details: Name: THE NATYA PARISHAD, SAGAR V.V.SG

Account No.: 10186726875 (Current A/c) IFSC Code: SBIN0001143

Bank Name: State Bank of India, UTD Branch, Sagar (M.P.)